देसी बहन की चुदाई: भाई के साथ

आपका स्वागत है मेरी सेक्स कहानी पर, ये मेरी पहली सेक्स कहानी है। मेरा नाम राहुल है, 24 साल का, और मैं हरियाणा के एक छोटे से गाँव में अपनी छोटी बहन, प्रिया, और अपने परिवार के साथ रहता हूँ। मैं खेतों में काम करता हूँ, और मेरा जिस्म मेहनत से गठीला है। मेरा 8 इंच का मोटा लंड गाँव की लड़कियों की नजरों में हमेशा रहता है, लेकिन मेरी नजरें मेरी बहन, प्रिया, पर टिक गई थीं। प्रिया, 22 साल की, एक देसी हसीना थी, जिसका गदराया जिस्म किसी को भी दीवाना कर दे। उसकी गोरी त्वचा, बड़ी-बड़ी रसीली चूचियाँ, पतली कमर और गोल-मटोल गांड उसकी चुन्नी और सलवार-कमीज में उभरकर मेरे लंड में आग लगा देती थी। उसकी भूरी आँखें और गुलाबी होंठ जैसे चूमने की खुली दावत दे रहे हों।

प्रिया और मैं बचपन से ही करीब थे, लेकिन पिछले कुछ समय से उसकी शरारती मुस्कान और मेरे जिस्म को घूरने वाली नजरें मेरे लंड में सिहरन पैदा करने लगी थीं। मैंने कई बार देखा कि जब वो नहाने के बाद गीले कपड़ों में बाहर आती, तो उसकी चूचियाँ उसकी टाइट कमीज में उभर जाती थीं, और उसकी गोल गांड उसकी सलवार में हिलती थी। मेरी चूत गीली हो जाती थी, और मुझे यकीन था कि प्रिया भी मेरे मोटे लंड की भूखी थी।

वो 20 सितंबर 2025 की रात थी, सुबह 8:28 बजे के आसपास, जब गाँव में हल्की ठंडी हवाएँ चल रही थीं, और चाँदनी रात माहौल को कामुक बना रही थी। हमारे माता-पिता पास के गाँव में एक शादी में गए थे, और घर में सिर्फ मैं और प्रिया थे। मैं अपने कमरे में लेटा था, और प्रिया रसोई में चाय बना रही थी। उसने एक पतली सी गुलाबी सलवार-कमीज पहनी थी, जो उसके जिस्म से चिपक रही थी। उसकी चूचियाँ कमीज में साफ उभर रही थीं, और उसकी गोल गांड हर कदम पर हिल रही थी।

“राहुल भैया, चाय तैयार है। आ जाओ,” प्रिया ने अपनी मधुर आवाज में बुलाया। मैं रसोई में गया, और उसकी चूचियों को घूरने से खुद को रोक नहीं पाया। “प्रिया, चाय तो ठीक है, लेकिन तू आज कुछ ज्यादा ही हॉट लग रही है,” मैंने हँसते हुए कहा। प्रिया ने पलटकर देखा और एक मादक मुस्कान दी। “भैया, तुम भी तो कुछ कम नहीं हो। तुम्हारा लंड मेरी चूत को तड़पा रहा है,” उसने शरारत से कहा। उसकी बात सुनकर मेरा लंड पैंट में तन गया।

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मैंने हिम्मत जुटाई और कहा, “प्रिया, अगर तेरी चूत मेरे लंड की भूखी है, तो आज रात उसे पूरा सुख दूँगा।” प्रिया ने गैस बंद किया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई। मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया और उसके रसीले होंठों को अपने होंठों से चूस लिया। वो चुंबन इतना गहरा और गर्म था कि मेरे जिस्म में बिजली सी दौड़ गई। प्रिया ने मेरी बनियान उतार दी और मेरे गठीले सीने पर अपने नाखून फिराए। “भैया, तेरा जिस्म तो पत्थर जैसा है,” उसने फुसफुसाया।

मैंने प्रिया की चुन्नी सरका दी, और उसकी चूचियाँ उसकी टाइट कमीज में उभर आईं। मैंने उसकी कमीज उतार दी, और उसकी काली लेस ब्रा में उसकी रसीली चूचियाँ कैद थीं। मैंने ब्रा उतार दी, और प्रिया की चूचियाँ मेरे सामने थीं—गोल, टाइट और निप्पल्स तने हुए। मैंने उसकी चूचियों को अपने बड़े-बड़े हाथों में लिया और जोर-जोर से दबाना शुरू किया। उसकी सिसकारियाँ रसोई में गूँज उठीं। “भैया, मेरी चूचियों को और दबा… कितना मजा आ रहा है,” उसने सिसकारी भरे लहजे में कहा। मैंने उसके निप्पल्स को अपने मुँह में लिया, उन्हें चूसते और हल्के से काटते हुए। प्रिया की चूत गीली हो चुकी थी, और उसकी साँसें तेज हो रही थीं।

मैंने उसकी सलवार और पैंटी उतार दी, और उसकी टाइट चूत मेरे सामने थी—गुलाबी, गीली और बिना बालों की। मैंने घुटनों के बल बैठकर अपनी जीभ उसकी चूत पर फिराई। उसकी चीखें रसोई में गूँज उठीं। “भैया, मेरी चूत को चाट… और गहरा,” उसने चिल्लाया। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत की गहराइयों में डाली, और उसका रस मेरे मुँह में बहने लगा। मैंने उसके क्लिट को चूसा, और प्रिया की कमर उछलने लगी। “भैया, तू मेरी चूत को पागल कर रहा है,” वो सिसक रही थी।

प्रिया ने मेरी पैंट खींची और मेरा मोटा लंड बाहर निकाला। “भैया, तेरा लंड तो हथौड़ा है,” उसने शरारत से कहा, और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी। फिर उसने उसे अपने मुँह में लिया। उसकी जीभ मेरे लंड पर लपलपाती रही, और मेरी सिसकारियाँ तेज हो गईं। “प्रिया, तेरा मुँह मेरे लंड को निचोड़ रहा है,” मैंने सिसकते हुए कहा। उसने मेरे लंड को गहराई तक चूसा, और मैंने उसके बाल पकड़ लिए।

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मैंने प्रिया को रसोई के स्लैब पर बिठाया और उसकी टाँगें फैलाकर अपना मोटा लंड उसकी टाइट चूत में डाला। प्रिया चीख पड़ी, “भैया, तेरा लंड मेरी चूत को चीर रहा है!” मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू किया, और उसकी सिसकारियाँ तेज हो गईं। “और जोर से, भैया… मेरी चूत को फाड़ दे,” उसने चीखते हुए कहा। मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई, और हर धक्के के साथ उसकी चूचियाँ उछल रही थीं। मैंने उसके निप्पल्स को अपने मुँह में लिया, उन्हें चूसते और काटते हुए, और प्रिया की चीखें और तेज हो गईं।

मैंने प्रिया को रसोई से उठाया और बेडरूम में ले गया। हमारा बेडरूम मंद रोशनी और मखमली चादरों से सजा था, और बाहर की चाँदनी माहौल को और कामुक बना रही थी। मैंने प्रिया को बेड पर लिटाया और उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं। फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत में डाला और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। “प्रिया, तेरी चूत तो मेरे लंड की गुलाम है,” मैंने गुर्राते हुए कहा। उसने मेरे नितंबों को पकड़ा और कहा, “भैया, मेरी चूत को और चोद… मुझे तेरा लंड हर बार चाहिए।” मैंने उसकी गांड पर थप्पड मारा, और उसकी चीखें और तेज हो गईं।

मैंने प्रिया को पलट दिया और डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। मेरा लंड उसकी चूत में इतनी गहराई तक जा रहा था कि हमारे जिस्म एक-दूसरे में घुल गए। “हाँ, भैया… और गहरा… मेरी चूत को रगड़ दे,” प्रिया चिल्ला रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और उसे और जोर से चोदा, जैसे मेरी सारी वासना उसकी चूत में उतर रही हो। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, और मैंने फिर से उन्हें चूसा, उसके निप्पल्स को काटते हुए।

रात के बीच में, प्रिया ने फुसफुसाकर कहा, “भैया, तूने मेरी चूत को जन्नत दिखा दी।” मेरी बात सुनकर मेरा जोश दोगुना हो गया। मैंने अपनी रफ्तार और तेज की, और हर धक्के के साथ मेरी वासना उसकी चूत में गहराई तक उतर रही थी। “प्रिया, तू तो एकदम चुदक्कड़ निकली,” मैंने सिसकते हुए कहा।

पूरी रात, हमने एक-दूसरे के जिस्म को चखा। मैंने प्रिया को बेड के हर कोने में चोदा—कभी उसकी चूत को, कभी उसकी चूचियों को चूसते हुए, और कभी उसके नितंबों को सहलाते हुए। प्रिया ने मेरे मोटे लंड को बार-बार अपने मुँह में लिया, और उसकी जीभ ने मुझे पागल कर दिया। “भैया, तेरा लंड मेरी चूत का राजा है,” उसने सिसकारी भरे लहजे में कहा। हमने बेडरूम से छत तक चुदाई की, जहाँ चाँदनी के नीचे मैंने प्रिया को खाट पर लिटाकर चोदा। ठंडी हवाएँ और उसकी चीखें एक-दूसरे में मिल रही थीं।

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रात के चार बजे, जब चाँदनी और गहरी हो गई, प्रिया ने मेरे लंड को फिर से अपने हाथ में लिया। “ये अभी भी तना हुआ है,” उसने शरारत से कहा, और उसे फिर से चूसने लगी। मैंने प्रिया को अपनी गोद में बिठाया और फिर से चोदना शुरू किया। इस बार प्रिया ऊपर थी, और उसकी कमर हर धक्के के साथ लय में हिल रही थी। उसकी चूचियाँ मेरे चेहरे के सामने उछल रही थीं, और मैंने उन्हें चूसते हुए प्रिया को और जोर से चोदा। “भैया, तेरी टाइट चूत मेरे लंड को निचोड़ रही है,” मैंने कहा, और उसने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी।

जब सुबह की पहली किरण खिड़की से छनकर आई, हम दोनों नंगे, पसीने से लथपथ, एक-दूसरे की बाहों में लिपटे थे। प्रिया ने मेरे सीने पर सिर रखा और फुसफुसाया, “भैया, तूने मेरी चूत को रंगीन कर दिया।” मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा, “प्रिया, तेरी रसीली चूचियाँ और टाइट चूत ने मेरे लंड को दीवाना बना दिया।”

प्रिया ने मेरे होंठों पर एक गहरा चुंबन लिया, अपनी सलवार-कमीज ठीक की, और एक मादक मुस्कान के साथ बोली, “भैया, ये बात हमारे बीच रहे। लेकिन जब भी मम्मी-पापा बाहर जाएँ, मेरी चूत तेरा लंड माँगेगी।” मैंने उसकी कमर पकड़ी और कहा, “प्रिया, मेरा लंड हर बार तेरी चूत के लिए हाजिर रहेगा।”

जैसे ही प्रिया बेडरूम से बाहर निकली, उसने पलटकर देखा और एक शरारती पलक झपकी। “ये रात हमारी थी, भैया। लेकिन ये जुनून कभी खत्म नहीं होगा।” मैं जानता था, प्रिया की रसीली चूचियाँ और टाइट चूत मेरे लंड की आग को हर रात सुलगाती रहेंगी, और हमारे घर की दीवारें इस चुदक्कड़पन की गवाह बनेंगी।