पालपोश कर जवान की अपने देवर को फिर चुदवाई

Asanthust Bhabhi Sex Story, Bhabhi Devar Sex Kahani – बड़े घराने की चुदाई की कहानी शायद आप नहीं पढ़े होंगे। आज मैं आपको सुनाने जा रही हूँ। कैसे एक भाभी ने अपने देवर को पालपोष कर बड़ा किया चुदवाई। ये सच्ची कहानी है इस वेबसाइट पर क्यों की ये मेरी कहानी है मेरी अपनी कहानी मेरी सच्ची सेक्स कहानी।

मैं जब इस वेबसाइट पर आई तो पढ़ी लोगों ने अपनी सेक्स कहानियां लिखी है। तो मेरे मन में भी ये ख्याल आया की क्यों ना मैं भी अपने दिल की बात लिख डालूं क्यों की ये मेरी सिर्फ कहानी ही नहीं ज़िंदगी है। नफरत से प्यार तक और यहाँ पहुंचने में वर्षों लगे। आखिर ये सब कुछ कैसे हुया की पहले पाला पोसा फिर जवान और बालिक होने के बाद मैं अपनी हवस शांत की।

मेरा नाम सुनैना है। मैं राजस्थान की रहने वाली हूँ। मेरे परिवार में मेरे अलावा एक मेरा छोटा देवर है और कोई नहीं। मैं बड़े खानदान से आती हूँ। मेरी उम्र अभी 45 साल है। मैं हॉट और सुन्दर हूँ। गोरी हूँ मस्त हूँ। पर मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी किसी और से चुदाई नहीं की सिर्फ पति के अलावा और देवर के अलावा।

जब मैं शादी करके आई तो मेरा देवर छोटा था। आपसी रंजिश के कारन मेरा पति और मेरे ससुर की हत्या कर दी गयी। घर में मैं बची और मेरा छोटा देवर। मेरी सास जो की छह साल बाद चल बसी। मुझे बदला लेना था अपने पति के मौत का इसलिए मैं भागी नहीं। नहीं तो मेरे मायके वाले कह रहे थे की अब तो ज़िंदगी खराब हो गयी है इसलिए तुम वापस आ जाओ तुम्हारी शादी करवा देंगे। पर मैं ऐसा नहीं सोची और पूरी ज़िंदगी ससुराल में ही रहने का सोच ली अपने देवर के साथ। क्यों की अगर मैं चली जाती तो मेरा देवर भी नहीं रहता।

धीरे धीरे समय बीतता गया। मेरा देवर बड़ा होता गया। अच्छे से मैंने उसका लालन पालन किया। समय के साथ मेरा उम्र भी ढलने लगा पर मेरे शरीर की बनावट ही ऐसी है की मेरे अंग अभी जवान लड़कियों से कम नहीं है। और ससुराल में किसी चीज की कमी भी नहीं है। अपार सम्पति है।

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मुझे चुदने का मन भी करता था तो मैं मन मसोस कर रह जाती। क्यों की और कर भी क्या सकती थी। धीरे धीरे समय बीतना गया। मेरा देवर बड़ा हो गया। अब मुझे उसको बताने का था की क्या करने है। मैं उसको सारी बातें बताई। की कैसे मेरे पुरे खानदान को नष्ट कर दिया पड़ोस के लोगों ने एक मॉमूली सी जमीन की लड़ाई में।

मेरा देवर बदला लेने का ठाना और मुझे भी खुश रखने का वचन दिया। और मैं भी यही चाहती थी। धीरे धीरे दिन बीतना गया मैं अपने देवर के करीब आने लगी। क्यों की मैं अपनी ज़िंदगी को यु ही ख़राब नहीं करना चाहती थी। और जीना चाहती थी। धीरे धीरे देवर भी मेरा ख्याल रखने लगा।

अब मैं उसके पास कई बार ब्रा में ही आने लगी कई बार बाथरूम से ऐसे ही निकल जाती पेटीकोट ही पहन कर तो वो मेरी चूचियों को निहारता और मैं भी यही चाहती थी। धीरे धीरे वो भी मेरे में इंटरेस्ट लेने लगा। उसका बलसाली भुजा देखकर उसके गठीले शरीर को देखकर मैं भी कामुक होने लगती।

धीरे धीरे प्यार परवान चढ़ा और फिर वो मेरे करीब आ गया. वो था शिवरात्रि का दिन जिस दिन उसने मुझे पहली बार चुदाई किया और मैं भी मस्त होके अपने शरीर को सौंप दी। हुआ ये थे की वो मेरे साथ मंदिर गया था। मैंने वह पर मन्नत मांगी की जो मेरे दिल में है वो मुझे मिल जाये और उसने भी यही कहा। जब मंदिर से निकली तो मैं पूछी की तुमने क्या माँगा। तो वो बोला की पहले आप बोलो आपने क्या मांगा। तो मैं बोल दी की मैं तुझे मांगी हूँ तो उसने भी यही कहा की मैं भी आपको ही मांगा हूँ।

घर आते आती हम दोनों का मन बैचेन होने लगा। कभी मैं देखती उससे तो कभी वो देखता। और घर पहुंचकर हम दोनों एक दूसरे के गले लग गए। मैं इस पल का इंतज़ार 15 साल से कर रही थी। ऐसे तो गले कई बार लगाए थी पर उसदिन जो गले लगा था उसकी बात कुछ और थी।

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उसके सीने से जब मेरी चूचियां टकराई तो मैं पागल होने लगी और वो भी लम्बी लम्बी साँसे लेने लगा। हम दोनों के शरीर में करंट दौड़ गया था। धीरे धीरे वो मेरे होठ के करीब अपना होठ ले आया और मैं एक झटके से उसके होठ को चूसने लगी। वो पागल हो गया था। मैं भी पागल हो गयी थी वासना की आग में दोनों ही जलने लगे थे।

धीरे धीरे मैं उसको सहलाने लगी वो धीरे धीरे मेरी चूचियों को सहलाने लगा। उसके बाद मैं उसके लंड पर हाथ लगाई तो लंड बहुत मोटा और लम्बा हो चूका था। मुझसे रहा नहीं जा रहा था मैं तुरंत ही पेंट निचे कर दी। और मोटे लंड को पकड़कर अपने मुँह में ले ली।

उसके बाद उसके लंड को चूसने लगी वो आआह आआह आआह ओह्ह्ह करने लगा। उसके बाद मैं उसके हाथ पकड़कर अपने पलंग पर ले गयी। और लेट गयी। उसने मेरे ब्लाउज के हुक खोले साडी उतारी पेटीकोट खोले। ब्रा का हुक मैं खुद ही खोल दी।

फिर क्या था दोस्तों मेरी चूचियों को वो दबाते हुए चूसने लगा। मैं उसके बालों में अपनी ऊँगली डाल कर सहलाने लगी। ऐसा लग रहा था जन्मो का प्यास बुझ रहा था हम दोनों का। फिर वो मेरे होठ को चूसते हुए मेरी गर्दन पर किस करने लगा फिर चूचियों को मसलते हुए वो मेरी चूत के पास जा पंहुचा।

अब वो निचे जाकर दोनों पैरों के बिच बैठ गया दोनों टांगो को अलग अलग किया और फिर मेरी चूत चाटने लगा। मैं बेकाबू होने लगी। मेरी चूत से गरम गरम पानी निकलने लगा। वो मेरी चूत को पानी को पीने लगा। कभी वो मेरी गांड के तरफ भी अपनी जीभ ले जाता तो मुझे गुदगुदी होने लगती। मुझे बहुत आनंद आने लगा था।

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मैं उसके लंड को फिर से चूसना चाहती थी। मैंने इसारे किये तो वो तुरंत ही 69 की पोजीशन में आ गया। वो मेरी चूत को चाट रहा था और मैं उसके लंड को चूस रही थी। अब मेरे से सहा नहीं जा रहा था मेरी चूत की ज्वाला धधक रही थी। मुझे लंड चाहिए था। मैंने कहा – अब मेरी वासना को शांत कर दो।

वो तुरंत ही ऊपर आ गया मैं पेअर फैला कर उठा दी वो बिच में आ गया मेरी चूत पर अपना लंड सेट किया और जोर से धक्के दे दिया। ओह्ह्ह्हह्ह मोटा लंड लम्बा लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में समा गया। अब वो अंदर बाहर करने लगा। जोर जोर से धक्के देने लगा। मैं अपनी बाहों में उसको भर ली।

जोर जोर से वो ऊपर से मैं निचे से गांड उठा उठा कर धक्के देने लगी। मैं कामुकता की आग में धधक रही थी। ऐसा लग रहा था रेगिस्तान में वारिष हो रही है। मैं तृप्त हो रही थी। वो मेरी चूत को गांड को चूचियों को सहलाते हुए चोद रहा था। मैं धन्य हो गयी थी। पौधे से पेड़ तक मैं पहुंची थी।

करीब एक घंटे तक मैं अलग अलग तरीके से चुदवाई। फिर जाकर शांत हुई। उसके बाद हम दोनों के बिच कोई दूरियां नहीं है। अब चुदाई के बिना ना वो रह पता है ना मैं रह पाती है। ज़िंदगी में बहार आ गयी है।

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